Wednesday, June 26, 2019

सलमान ख़ान: पापा हमारे दोस्त जैसे हैं

डायरेक्टर अली अब्बास ज़फ़र सलमान खान के साथ 2016 में 'सुल्तान' और 2017 में 'टाइगर ज़िंदा है' लाये, तो वहीं अब 2019 में ईद के मौके पर ला रहे हैं भारत.
इस फ़िल्म में सलमान खान के साथ पहले प्रियंका चोपड़ा नज़र आने वाली थी, पर फ़िल्म की शूटिंग शुरू होने से कुछ ही दिन पहले ही प्रियंका चोपड़ा ने इस फ़िल्म को करने से मना कर दिया और फिर ये फ़िल्म आई कटरीना कैफ की झोली में.
जब कटरीना से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ''मुझे नहीं पता कि कौन सी हीरोइन पहले किसकी चॉइस थी, मुझे इतना पता है कि मैंने और अली ने इसकी बात 'टाइगर ज़िंदा है' के सेट पर की थी, पर ठीक है जो हुआ सो हुआ, प्रियंका नहीं कर पायी ये फ़िल्म उनके अपने कारण हैं. ये मेरी किस्मत है कि मुझे ये मिली, हर फ़िल्म की अपनी किस्मत होती है और भारत मेरी झोली में आ गिरी ये मेरी किस्मत है''
सलमान खान से उनकी निजी ज़िन्दगी के बारे में सवाल पूछा गया और जानना चाहा कि घर पर क्या उनको उनके पापा, हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर लेखक सलीम ख़ान से डर लगता है ?
जवाब में सलमान कहते हैं ''बचपन से लेके अब तक सब कुछ वैसा ही है, जब हम बच्चे थे तो उनके साथ ज़ादा वक़्त बिताने का मौका नहीं मिला, फिर जब हम बढे हुए, पापा उस समय बहुत बुरे वक़्त से गुज़र रहे थे, जो इतने बड़े राइटर थे एक वक़्त पर इंडस्ट्री में अचानक काम ही नहीं था. पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि पापा ने उस मुश्किल वक़्त का एहसास हम बच्चों को घर पर एक बार भी कभी दिखाया हो.''
सलमान आगे हँसते हुए ये भी कहते हैं कि ''अब वक़्त बदला है मॉडर्न हुआ है, वो प्यार अब भी वैसा है, अब वो हमारे दोस्त जैसे हैं, मज़ाक करते हैं, डबल मीनिंग जोक्स करते हैं, उनके जो दोस्त हैं वो हमारे दोस्त हैं, मेरे दोस्त उनके दोस्त हैं, अगर मैं घर पर नहीं हूँ तो कोई दिक्कत नहीं होती है, मेरे दोस्त आते हैं और खूब गप्पे मारते हैं पापा के साथ''
सलमान ख़ान अक्सर ईद के मौके पर नयी फ़िल्म लाते हैं, 2017 में ईद के मौके पर सलमान की 'ट्यूबलाइट' रिलीज़ हुई थी, जो उम्मीद से काफी कम चली.
2019 में ईद पर को सलमान की कटरीना और सुनील ग्रोवर के साथ भारत रिलीज़ हो रही है.
सलमान कहते है, '' ट्यूबलाइट ख़राब फ़िल्म नहीं थी, बल्कि उसको रिलीज़ करने का वक़्त खराब था, लोग मेरी फ़िल्मों में ईद जैसे ख़ुशी के त्यौहार में नाच गाना, मनोरंजन देखना पसंद करते हैं ना कि इमोशनल फिल्में''अब देखते हैं 'भारत' बॉक्स ऑफिस पर क्या धमाल मचाती है.''
"धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर राज्य अपने किसी भी नागरिक से कोई भेदभाव नहीं करेगा. ये मैं नहीं कह रहा, भारत के संविधान में लिखा है."
अनुभव सिन्हा निर्देशित और आयुष्मान खुराना अभिनीत फ़िल्म आर्टिकल 15 का महज़ एक डायलॉग समझने की भूल मत कीजिएगा. ये भारतीय संविधान के आर्टिकल (अनुच्छेद) 15 की पहली लाइन है. आर्टिकल 15 यानी समानता का अधिकार.
यूं तो भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था लेकिन बीते कुछ सालों में ये अलग-अलग वजहों में लगातार चर्चाओं में रहा है.
कभी सत्ता में बैठे लोगों की ओर से संविधान संशोधन को लेकर तो कभी विपक्षी पार्टियों की ओर से संविधान को ख़तरे में बताने की वजह से.
ऐसे में जब 'आर्टिकल 15' नाम से फ़िल्म आ रही है तो इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है. रिलीज़ के कुछ ही घंटों में 'आर्टिकल 15' के ट्रेलर को लाखों लोगों ने देखा.
आइए पहले आपको बताते हैं कि आख़िर आर्टिकल 15 है क्या और क्यों मौजूदा दौर में संविधान के इस आर्टिकल पर फ़िल्म के बहाने हो रही बहस को कुछ लोग ज़रूरी मान रहे हैं.