फ़िल्म दामिनी का सीन- बैरिस्टर इंद्रजीत चड्डा बने अमरीश पूरी गोविंद ऊर्फ सनी देओल से कोर्ट का मामला
बाहर रफ़ा दफ़ा करने आते हैं. लेकिन सनी उनकी बात मानने से साफ़ इनकार करते
हुए कहते हैं- "ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर उठता है, तो आदमी उठता
नहीं, उठ जाता है."
वैसे सनी के इस 'ढाई किलो के हाथ' का शिकार उनके छोटे भाई बॉबी भी हो चुके हैं.
दोनों भाई एक बार फिर साथ आ रहे हैं फ़िल्म 'यमला पगला दीवाना फिर से' में. फ़िल्म के प्रोमोशन के मौके पर जब सनी से पूछा गया कि बड़े भाई होने के नाते क्या बचपन में उन्होंने कभी बॉबी की पिटाई की है तो उनका कहना था, ''बॉबी मुझसे काफ़ी छोटा है इसलिए उसपर हाथ उठाने का खयाल कभी नहीं आया. वो मेरे बेटे जैसा है.''
हालांकि जब यही सवाल बॉबी से पूछा गया तो उन्होंने सनी की पोल खोलते हुए बताया, ''भइया ने एक बार मुझपर हाथ उठाया था. मेरी ट्यूशन टीचर ने मेरी पढ़ाई की शिकायत भइया से की थी. फिर भइया ने मुझसे कुछ सवाल पूछे जिनका जवाब मैं नहीं दे पाया. तब भइया ने गुस्से में मुझे थप्पड़ मारा था."लेकिन उसके बाद मुझे कभी मार नहीं पड़ी क्योंकि मैं उस थप्पड़ से इतना रोया था कि भइया को मुझपर हाथ उठाने से डर लगने लगा."
यमला पगला दिवाना सिरीज़ के अलावा बड़े पर्दे पर दोनों भाई दिल्लगी, अपने और पोस्टर बॉयज़ जैसी फ़िल्मों में साथ नज़र आ चुके हैं.
वैसे सनी का ढाई किलो का हाथ भले ही कईयों पर पड़ा है, लेकिन एक शख़्स ऐसा भी है जिनके हाथ सनी पर भारी पड़े हैं. वो है उनके पापा धर्मेंद्र का तीन किलो का हाथ.
फ़िल्म 'सीता और गीता' में धर्मेंद्र गीता यानि हेमा मालिनी को तीन किलो का हाथ मारकर दीवार में चिपकाने की बात कहते हैं.
असल ज़िंदगी में उन्होंने एक बार सनी की पिटाई की थी. ये बात उन्होंने 'यमला पगला दीवाना फिर से' के प्रोमोशन के दौरान बताई जिसमें वो अपने दोनों बेटे- सनी और बॉबी के साथ फिर से दिखाई देंगे.
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गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर अक्सर नाराज़ हो जाते हैं, कभी ग़लत उर्दू या हिंदी बोलने की बात पर, तो कभी इस दौर के संगीत को लेकर.
हाल ही में उनकी नई फ़िल्म पलटन के एक इवेंट पर उन्होंने फिर से अपनी नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि जावेद अख़्तर से गाने मत लिखवाया करो, वो गानों में शायरी लिख देते हैं. गानों में शायरी मांगने वाले बहुत कम हो गए हैं. अगर गाने के बोल में कुछ मतलब या गहराई है तो ये उनके लिए ख़तरे की बात हो जाती है."
"कुछ फिल्म मेकर, जो अपने गानों में अब भी गहराई चाहते हैं, उनमें से एक हैं जेपी दत्ता."
दरअसल नई फिल्म पलटन में जावेद अख़्तर और जेपी दत्ता एक साथ काम कर रहे हैं. जेपी दत्ता फ़िल्म के कहानीकार हैं, जबकि गानों के बोल जावेद अख़्तर ने लिखे हैं. म्यूजिक दिया है अनु मलिक ने. आई जेपी दत्ता की फ़िल्म बॉर्डर में भी जावेद अख़्तर ही गीतकार थे और अनु मलिक ने संगीत दिया था. 21 साल बाद बॉर्डर की यह टोली, पलटन लेकर आ रही है, जो 7 सितंबर को रिलीज़ होगी.
बॉर्डर फ़िल्म के "संदेशे आते हैं" और "तो चलूं" गाने दर्शकों के बीच खासे लोकप्रिय हुए थे. इन गानों को लोग आज भी उतने ही चाव से सुनते हैं, जितना 1997 में सुना करते थे.
जावेद अख़्तर ने आज-कल के गानों पर हैरानी जताई है. वो कहते हैं कि आज-कल के गीतों को गीत कहा भी जाए या नहीं.
जावेद कहते हैं, "आज-कल के गानों में सिंगर की आवाज़ और ऑर्केस्ट्रा, ड्रम, गिटार और तबले की आवाज़ मिक्स होती है. ये सारे साधन आवाज़ के ऊपर बज रहे होते हैं, इससे सिंगर की आवाज़ कहीं नीचे दब जाती है. ऐसे में आवाज़ को कभी-कभी खोदकर निकालना पड़ता है और कभी तो निकाल भी नहीं पाते. अब जब आवाज़ ही सुनाई नहीं देती, तो शब्द अच्छे हैं या बुरे, किसे फर्क पड़ता है."
यंग जनरेशन को यही सब सुनना पसंद है, इस पर जावेद अख़्तर तंज कसते हुए कहते हैं, "अगर ऐसा है तो सिंगिंग रियालिटी शो में सब लता जी, रफ़ी, मुकेश, किशोर दा के गाने क्यों गाते हैं?"